ऋषि वत्स को धनवन्तरी कवच निर्माण की प्रेरणा क्यों उत्पन्न हुई ?

भारत विश्व में मधुमेह, कैंसर एवं एनीमिया का केन्द्र बन गया है। 30 वर्षों तक रोगियों को देखा, विद्यालय प्रबन्धक के रुप में गरीबों एवं सम्पन्न परिवारों के कुपोषित बच्चों को भी देखा। कारण समझने के लिए चिंतन चलता रहा और समझ में आया कि 90% से अधिक कुपोषण केवल गलत रहन-सहन, गलत खानपान और परम्पराओं को त्याग देने के कारण उत्पन्न हो रहा है। भोजन पकाने के परम्परागत लोहे, पीतल व मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग छोड़ा तो मधुमेह, कैंसर, एनीमिया रोधी धातुएँ भी छूट गयी और भारतीय समाज उपरोक्त रोगों का शिकार बन गया। प्रेशर कूकर आया तो पीतल के बर्तन छूट गये और हमारे भोजन से कैंसर रोधी ताँबा भोजन से मिलना भी छूट गया। मधुमेह रोधी जस्ता भोजन में मिलना भी छूट गया और धीरे-धीरे भारत कैंसर व मधुमेह का केन्द्र बन गया। लोहे की कढ़ाही आदि का प्रयोग बंद हुआ तो माताएँ, बहनें एवं बच्चे एनीमिया का शिकार हो गये और ऐसे माता-पिताओं से
उत्पन्न अगली पीढ़ी भी एनीमिक ही उत्पन्न होने लगी और एनीमिक ही जीने के लिए मजबूर हो गयी। क्योंकि आधुनिकता, सुविधा और आवश्यकता के कारण प्रेशर कूकर का प्रयोग नहीं छूट सकता तथा लोहे, पीतल एवं मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग अब व्यवहारिक नहीं है।
अतः मानव जाति के कल्याण हेतु धनवन्तरी कवच का निर्माण ताँबा, जस्ता, लोहा आदि धातुओं से किया गया हैं। भगवान धनवन्तरी के ज्ञान की कृपा से धनवन्तरी कवच का प्रतिदिन उपयोग करने से प्रतिदिन की आवश्यकतानुसार समस्त आवश्यक धातुएँ भोजन पकते समय प्रयुक्त मसालो द्वारा पचकर शरीर में शोषित होने योग्य बन जाती हैं। जबकि दवाइयों के रूप मे ली जाने वाली धातुएँ कॉपर, जिंक, आयरन, मिनरल्स शरीर में आंशिक रूप से ही शोषित हो पाते हैं तथा अधिक प्रभावी नहीं होते हैं।